सुसमाचार की सामर्थ्य से अभिभूत होना — पीछे मुड़कर देखना और मनन करना
ऑडियो के बारे में: इस पाठ की ऑडियो रिकॉर्डिंग कोरियाई भाषा में है। नीचे की सामग्री हिन्दी में है, पर प्ले दबाने पर आपको कोरियाई भाषा सुनाई देगी।
[दी गई ऑडियो सामग्री को सुनते हुए उत्तर लिखिए।]
रोमियों 1:16-17
1. मैं सुसमाचार से लज्जित नहीं हूँ
पौलुस ने कहा कि वे सुसमाचार से लज्जित नहीं हैं। उन्होंने ऐसा क्यों कहा? क्योंकि उस समय सुसमाचार का कड़ा विरोध हो रहा था।
1 कुरिन्थियों 1:22-23
यहूदी चिह्न और सामर्थ्य चाहते थे। वे राजनीतिक मसीहा की आशा करते थे। यूनानी ज्ञान खोजते थे। उस समय प्रसिद्ध दार्शनिकों की विचारधाराएँ प्रचलित थीं। पर सुसमाचार यीशु की मृत्यु और पुनरुत्थान का समाचार है। यह यहूदियों को एक अशुभ कहानी जैसा सुनाई देता था। और यूनानियों को यह मूर्खता जैसा लगता था।
1 कुरिन्थियों 1:24
“लोग इसे पसन्द न करें, फिर भी मैं सुसमाचार से लज्जित न होऊँगा, क्योंकि इस क्रूस और पुनरुत्थान को सुनाने पर कोई उद्धार पाता है।” इसी निश्चय के साथ पौलुस ने केवल यीशु के क्रूस और पुनरुत्थान का सुसमाचार सुनाया।
मनन के प्रश्न
Q. क्या यीशु के क्रूस और पुनरुत्थान को लेकर आपके मन में गहरा आनंद और निश्चय है? क्या पौलुस की तरह आपको यह निश्चय है कि क्रूस और पुनरुत्थान का संदेश परमेश्वर का ज्ञान और सामर्थ्य है? इससे आगे, क्या आपने अनुभव किया है कि सुसमाचार की वह सामर्थ्य आपके द्वारा दूसरों तक पहुँची? यदि किया है, तो लिखिए।
2. सुसमाचार में निहित उद्धार की सामर्थ्य
रोमियों 1:16
संसार की सबसे बड़ी सामर्थ्य सुसमाचार में निहित उद्धार की सामर्थ्य है। हमें इसका अनुभव करना है। तब हम इसे सुनाते हैं।
पहला, पाप-क्षमा (ऑडियो सामग्री के 20 मिनट से सुनकर व्यवस्थित कीजिए।)
रोमियों 3:23-24
मनन के प्रश्न
Q. बाइबल मनुष्य की मूल समस्या को क्या कहती है?
Q. बाइबल में बताया पाप क्या है?
Q. पाप-क्षमा (छुड़ाए जाने) का क्या अर्थ है? ऑडियो सुनकर विस्तार से लिखिए।
दूसरा, जीवन (ऑडियो सामग्री के 25 मिनट से सुनकर व्यवस्थित कीजिए)
रोमियों 5:18
मनन के प्रश्न
Q. यह जीवन किस प्रकार का जीवन है?
यूहन्ना 4:13-14
Q. क्या आपने संसार का जल पीकर भी न भरने वाली प्यास का अनुभव किया है? वह क्या थी?
Q. क्या आपने सुसमाचार के द्वारा यीशु से मिलकर उस जीवन का अनुभव किया है जिसने आपको भरा? लिखिए।
पुनरावलोकन
परमेश्वर ने यह अपार जीवन और कहीं नहीं रखा। उसे केवल यीशु के क्रूस और पुनरुत्थान के सुसमाचार में रखा है। इसलिए केवल सुसमाचार उद्धार देने वाली परमेश्वर की सामर्थ्य है। इसी सुसमाचार से हमें उद्धार मिला है। हमें सुसमाचार का मूल्य और अधिक जानना है। हमें सुसमाचार को और अधिक जानना है। यही संसार में सबसे महत्वपूर्ण है।
इस समय प्रार्थना करें। कम-से-कम दस मिनट तक व्याकुल होकर प्रार्थना कीजिए।
“परमेश्वर, मुझ पर इस सुसमाचार को और प्रकट कीजिए। मुझे सुसमाचार की महिमा जानने और उसकी सामर्थ्य का अधिक अनुभव करने दीजिए। मुझे सुसमाचार से ऐसा बाँध लीजिए कि इसे सुनाए बिना न रह सकूँ! सबसे बढ़कर, यह प्रशिक्षण एक और पाठ्यक्रम बनकर न बीत जाए, पर सुसमाचार मेरे भीतर गहराई से अंकित होने का समय बने!”
💡 यात्रा को पीछे मुड़कर देखना
इस यात्रा में देखी गई बातों पर गहरा मनन करें और सोचें कि उन्हें अपने जीवन और सेवकाई में कैसे लागू कर सकते हैं।
👉 जीवन के प्रश्न और सुसमाचार की सामर्थ्य · यात्रा को पीछे मुड़कर देखना